मप्र लेखक संघ इकाई मंडला की पावस गोष्ठी आयोजित
मंडला-प्रदेश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था मध्यप्रदेश की मंडला इकाई के द्वारा इकाई-अध्यक्ष प्रो.शरद नारायण खरे के संयोजन-संचालन में पावस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागी कवि-कवयित्रियों ने पावस के स्वरूप व प्रकृति पर केंद्रित एक से बढ़कर एक गीत, दोहे, छंदबद्ध व मुक्तछंद की रचनाएँ प्रस्तुत कर परिवेश को आनंदित कर दिया।
सरस्वती-पूजन से काव्य गोष्ठी प्रारम्भ हुई। तत्पश्चात अर्चना जंघेला ने सस्वर सरस्वती-वंदना कर माहौल को सरस कर दिया। अरविंद कुमार शुक्ल जी ने अपनी कविता में बरसात के दृ्श्यों को इस तरह से पेश किया कि सब वाह-वाह कर उठे। कवयित्री नीलम खरे ने पावस की झाँकी प्रस्तुत करते हुए श्रेष्ठ दोहे तरन्नुम में पेश कर कार्यक्रम को रससिक्त कर दिया---
"मानसून का ख़त मिला, वर्षा हुई प्रसन्न।
मेघों की महती दया, उगा खेत में अन्न।।"

डा संध्या शुक्ल ‘मृदुल’, इकाई सचिव ने वर्षा के अवयवों को आधार बनाकर मनभावन रचना पेश की, जिसने परिवेश को उल्लासमय कर दिया।उनकी कविता सभी ने बहुत पसंद की।
इकाई अध्यक्ष प्रो.शरद नारायण खरे ने पावस का सांगोपांग चित्रण करने मनोहारी गीत समग् गेयता के साथ प्रस्तुत कर कार्यक्रम को तरंगित कर दिया। उनके गीत ने ग्रीष्म के कष्ट को आनंद में बदलते हुए दिखाकर पावस के मधुर अहसासों की व्यावहारिक अनुभूतियाँ पेश की गईं।
“दिनकर ने शोले बरसाए, पर अब तो राहत है।
बहुत दिनों के बाद सभी की, खिली-खिली तबियत है।।
आसमान से अमिय बरसता, हर प्राणी पुलकित है।
वरुण देव की दया हो गई,मिला खुशी का ख़त है।।
बहुत दिनों के बाद सभी की,खिली-खिली तबियत है।।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण में पावस पर केंद्रित फिल्मी गीतों की शानदार प्रस्तुतियाँ गायक-गायिकाओं ने दी। जिनमें श्रीमती मीना शुक्ला ने "रामा रामा गजब होई गवा रे----", श्रीमती नीलम खरे ने "ओ सजना बरखा बहार आई---, अँखियों में प्यार लाई "श्रीमती गीता काल्पीवार ने"भोर भये पंछी--- और प्रो. शरद नारायण खरे ने "डम डम डिगा डिगा, मौसम भीगा भीगा---"पेश कर सुर, लय, ताल की झड़ी लगा दी।अर्चना जंघेला व डा संध्या मृदुल ने भी गीतों को बखूबी पेश किया।
अंत में, इस यादगार पावस गोष्ठी की सफलता का श्रेय आयोजकों द्वारा सभी प्रतिभागियों को देते हुए धन्यवाद ज्ञापन के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।
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