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Tuesday, May 12, 2026
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कोदो-कुटकी की खेती में कम लागत पर अधिक लाभ मिलता है (मण्‍डला समाचार)

विजयपुर एवं कुम्हर्रा में कृषक संगोष्ठी संपन्न

            बीजाडांडी विकासखंड के ग्राम विजयपुर तथा मोहगांव विकासखंड के कुम्हर्रा में कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें किसानों को जैविक खेती के बढ़ते महत्व तथा कोदो-कुटकी, चिया, रागी आदि मिलेट्स की खेती को व्यावसायिक रूप प्रदान करने के संबंध मंे जानकारी प्रदान की गई। संगोष्ठी में विषय-विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि कोदो-कुटकी सहित अन्य मोटे अनाजों में पौष्टिक तत्व होते हैं, जो हमें विभिन्न प्रकार के रोगों से बचाते हैं। वैज्ञानिक भी कोदो-कुटकी, चिया, रागी आदि मिलेट्स के उपयोग की सलाह देते हैं जिसके कारण इनकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है। कुम्हर्रा में आयोजित कृषक संगोष्ठी में परियोजना अधिकारी आत्मा आरडी जाटव एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आरके मांडले तथा विजयपुर में आयोजित संगोष्ठी में अनुविभागीय अधिकारी कृषि निवास देवेन्द्र बारस्कर एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी संगीता श्रीवास्तव सहित संबंधित उपस्थित रहे।

            प्रशिक्षण में बताया गया कि मोटे अनाज की खेती में पानी की कम आवश्यकता होती है जबकि मुनाफा अधिक होता है। संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को कोदो-कुटकी की खेती में उन्नत किस्म के बीज लगाने तथा खेती में वैज्ञानिक तरीकों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।  खेती में उन्नत प्रमाणित बीज के उपयोग और कतार में बोनी करने मात्र से 15 से 20 प्रतिशत उपज बढ़ जाती है। कतार पद्धति से बोनी करने पर बीज की मात्रा कम लगती है वहीं छिड़काव पद्धति से बीज अधिक लगता है जिससे कृषि की लागत बढ़ती है। कोदो-कुटकी, रागी, आदि मोटे अनाज की खेती में रसायनिक खाद की आवश्यकता नहीं  है। जैविक खाद का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जा सकती है। इन फसलों के लिए गोबर खाद, केंचुआ खाद, जीवामृत का उपयोग किया जा सकता है जो मिट्टी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मददगार होते है। प्रशिक्षण में कोदो-कुटकी की खेती में कृषि यंत्रों के उपयोग तथा उपलब्धता तथा कोदो-कुटकी के संग्रहण, प्रसंस्करण एवं मार्केटिंग आदि के संबंध में भी चर्चा करते हुए समुचित मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

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