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Monday, January 26, 2026
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जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण

मंडला : हम अगर हमारे चारों और देखे तो ईश्वर की बनाई इस अद्भुत पर्यावरण की सुंदरता देख कर मन प्रफुल्लित हो जाता है पर्यावरण की गोद में सुंदर फूल, लताये, हरे-भरे वृक्षों, प्यारे -प्यारे चहचहाते पक्षी है, जो आकर्षण का केंद्र बिंदु है आज मानव ने अपनी जिज्ञासा और नई नई खोज की अभिलाषा में पर्यावरण के सहज कार्यो में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है जिसके कारण हमारा पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, हम हमारे दोस्तों परिवारों का तो बहुत ख्याल रखते हैं परंतु जब पर्यावरण की बात आती है तो बस किसी राष्ट्रीय पर्व या फिर स्वच्छ भारत अभियान, के समय ही पर्यावरण का ख्याल आता है लेकिन यदि हम हमारे पर्यावरण का और पृथ्वी के बारे में सोचे तो इस प्रदूषण से बच सकते हैं और हां मनुष्य पृथ्वी पर एकमात्र प्रजाति नहीं है जिसे जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। वास्तव में, इस ग्रह पर प्रत्येक प्रजाति को जीवित और जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। पानी के बिना, जलीय जीवन जीवित रहने का कोई मौका नही होगा । यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है कि हम पानी को बचाए रखें जो हमारे स्थायित्व के लिए आवश्यक है। जल का संरक्षण करने का अर्थ है कि हमारे पानी की आपूर्ति का बुद्धिमानी से उपयोग करना और जिम्मेदार होना। तब ही आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की रक्षा होगी। साथ उतना ही
पौधारोपण अति अवश्य है । पानी के साथ साथ स्वच्छ हवा भी जरूरी है अभी हमने कुछ महिनों में देख भी लिया है ।
इन सब बातो को ध्यान में रखते हुए 12 मई 2019 को नगर के कुछ युवाओं ने जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण के क्षेत्र में काम चालू किया लोग जुड़ते चले गये और जो अब बड़े रूप में पर्णित हो गया आगे चल कर युवाओं ने अपने गु्रप को ‘जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण समिति’ में तब्दिल कर दिया युवाओं ने सर्वप्रथम वृक्षारोपण के लिए सिद्ध टेकरी को चुना जो विरान हो चुकी थी आज सिद्ध टेकरी इस समिति के लिए एक माॅडल बन गया इस लाईन को लिखते हुए अब तक समिति के सिद्ध टेकरी में सेवा देते हुए 727वां दिन व रोपित पौधो की संख्या 1106 एवं संरक्षित पेड़ो की संख्या लगभग 700 से 1000 होगी जो अब इन युवाओं की मेहनत आज सिद्ध टेकरी में देखने को मिलती है । साथ ही समिति ने 5 जून 2021 से एक अभियान कुंभ स्थल पर भी चलाया है विगत 48 दिनों से कार्यरत है । अब तक कुंभ स्थल पर 1100 पौधों का रोपण एवं संरक्षित पेड़ की संख्या 12 के लगभग होगी। समिति एक ऐसा प्रयास कर रही है कि स्वयं की नर्सरी हो जो भविष्य में स्वयं के लिए पौधे रोपण के लिए पौधें तैयार मिल सके । इस के लिए एक माॅंडल तैयार किया गया है । साथ ही पौधा बैंक की योजना पर भी विचार चल रहा है ।

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