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कचड़ा से कंचन की तरफ बालटोली ग्राम नैथाई के बच्चे (अशेाक नगर)

जनपद पंचायत ईसागढ़ के ग्राम पंचायत आनंदपुर के ग्राम नैथाई में ग्राम जल एवं स्वच्छता के लिए तैयार की गई बच्चों की टोली अर्थात बालटोली द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस को दृष्टिगत रखते हुए एक नवाचार का प्रारंभ किया गया। जिसके तहत बच्चों द्वारा घरों के आसपास पड़ी खाली जगह में किचन गार्डेन, पोषण वाटिका में नर्सरी तैयार करने का तरीका सीखा जिसके तहत हमारे पर्यावरण को प्रभावित करने वाले प्लास्टिक के कचरे विशेष रूप से प्लास्टिक के बोतल व डिब्बों को एकत्र करके उसमे देशी खाद, मिट्टी भरकर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रदाय सब्जी किट व अन्य बीजों को रोपित किया गया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र अशोक नगर के प्रमुख प्रधान वैज्ञानिक डा. बी.एस. गुप्ता द्वारा बच्चों को पौधरोपण के विभिन्न तरीके बताए गए। साथ में वैज्ञानिक (हार्टिकल्चर) डा. के. के. यादव द्वारा नर्सरी लगाने व पोषण वाटिका में सब्जी तैयार करने का तरीका सिखाया गया। स्वच्छ भारत मिशन के विकासखंड समन्वयक सतपाल जाट द्वारा इस कदम को नैथाई की स्वच्छता के लिए एक नई पहल के साथ प्लास्टिक का पुनरुपयोग का अच्छा मॉडल बताया। इस अवसर मध्य प्रदेश जल निगम मर्यादित पी आई यू गुना द्वारा संचालित राजघाट बांध समूह जल प्रदाय योजना,जनपद पंचायत ईसागढ़ में कार्यरत क्रियान्वयन सहायक संस्था कम्यूनिटी एक्शन थ्रू मोटीवेशन प्रोग्राम “कैम्प” के परियोजना प्रबंधक मनोज कुमार पाण्डेय ने बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि बच्चों द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयास की नई पहल से जहा ग्राम में पानी से होने वाले कीचड़ को रोककर बीमारी से बच सकते हैं वही, कम पानी में एक अच्छी नर्सरी तैयार कर घर के लोगो को शुद्ध सब्जी देकर अपनी स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था दोनो को मजबूत करने में भी सहयोग कर सकते हैं व घर के प्रयोग हुए पानी का पुनरुपयोग भी। कार्यक्रम में राजकुमार केवट, अध्यक्ष बालटोली कार्तिक ओझा सहित ग्राम के 25 बच्चे उपस्थित रहे व आयोजित कार्यक्रम में बच्चों ने बहुत ही ध्यान पूर्वक बताए गए तरीकों को सीखने का प्रयास किया। कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छ भारत मिशन ईसागढ़, कृषि विज्ञान केन्द्र अशोक नगर व म. प्र. जल निगम मर्यादित, पी आई यू गुना की क्रियान्वयन सहायक संस्था कम्युनिटी एक्शन थ्रू मोटीवेशन प्रोग्राम “कैम्प” द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। तैयार किए गए पौधों को स्थानीय पोषण वाटिकाओं में रोपण के साथ-साथ पर्यावरण दिवस पर वितरित किए जायेंगे।

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