
मण्डला। शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच विकासखंड मण्डला की ग्राम पंचायत सिलपुरा के पोषक ग्राम बुजबुजिया का प्राथमिक विद्यालय विभागीय उदासीनता और लापरवाही का शिकार बना हुआ है। लगभग 12 वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवन के कारण यहां अध्ययनरत बच्चों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नया भवन नहीं बनने से निराश ग्रामीणों को उस समय उम्मीद जगी थी जब विद्यालय की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत होने के बाद कार्य प्रारंभ कराया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में निर्माण कार्य बंद हो जाने से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्षों से विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर लगातार मांग उठाई जाती रही, लेकिन जिम्मेदार विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में मरम्मत कार्य शुरू होने के बाद भवन के कुछ हिस्से को तोड़ दिया गया, लेकिन इसके बाद कार्य अचानक बंद कर दिया गया। अधूरी स्थिति में छोड़े गए भवन के कारण बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध कराने की उम्मीद भी अधूरी रह गई है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि भीषण गर्मी के बीच छात्र-छात्राओं को तिरपाल और अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे खुले वातावरण में पढ़ाई करनी पड़ रही है। न तो पर्याप्त छाया की व्यवस्था है और न ही बच्चों की सुरक्षा की कोई गारंटी। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग केवल बैठकों और कागजी योजनाओं तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर बच्चों की समस्याओं की ओर कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों द्वारा जून माह के अंत तक मरम्मत कार्य पूर्ण कर 1 जुलाई से विद्यालय का संचालन भवन में शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर यह दावा खोखला साबित होता दिखाई दे रहा है। निर्माण कार्य बंद होने से बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों में भी असंतोष और नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब भवन की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है तो आखिर कार्य बीच में क्यों रोक दिया गया? इसके लिए कौन जिम्मेदार है और बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी? उनका कहना है कि शिक्षा और सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर विभागीय चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि असुरक्षित परिस्थितियों या भीषण गर्मी के कारण किसी बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अथवा कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा मरम्मत कार्य को तत्काल पूरा कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की यह लापरवाही अब केवल प्रशासनिक कमी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनकी सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
जिला शिक्षा केंद्र ने दी यह जानकारी
इस संबंध में जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केंद्र मण्डला कुलदीप कटहल ने बताया कि विद्यालय भवन की मरम्मत का कार्य ईआरईएस (E-RES) द्वारा कराया जा रहा है। लगभग 3 लाख 34 हजार रुपये की लागत से भवन में लेंटर निर्माण तथा बच्चों के बैठने के लिए फर्श का कार्य प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि यदि स्वीकृत राशि कम पड़ती है तो इसके लिए संशोधित प्राक्कलन (रिवाइज इस्टीमेट) भी मंगाया गया है, जिस पर जिला कलेक्टर मण्डला के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा से जुड़े इस मामले में केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर शीघ्र कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले विद्यार्थियों को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में शिक्षा उपलब्ध हो सके।